सत्ता के गलियारे से... रवि अवस्थी,प्रधानमंत्री के 'मेगा शो ' का रोडमैप -

सत्ता के गलियारे से... रवि अवस्थी -
 
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सत्ता के गलियारे से... रवि अवस्थी,प्रधानमंत्री के 'मेगा शो ' का रोडमैप -

** प्रधानमंत्री के 'मेगा शो ' का रोडमैप 
भाजपा यूं तो हर वक्त चुनावी मोड में होती है और हर चुनाव को वह योजनाबद्ध तरीके से लड़ती भी है लेकिन बढ़ती अपेक्षाओं व महत्वाकांक्षाओं ने 'मिशन-23' को उसके लिए चुनौतीपूर्ण बना दिया है । माना जा रहा है कि पार्टी अगले सभी चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को ही आगे कर लड़ेगी । ऐसे में पार्टी की मप्र इकाई ने ही प्रधानमंत्री के आधा दर्जन 'मेगा शो' का रोडमैप तैयार किया है । इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उनके अपने जन्मदिन पर ग्वालियर-चंबल अंचल के कूनो प्रवास से हुई । उनका अगला दौरा 9 अक्टूबर शरद पूर्णिमा को उज्जैन में प्रस्तावित है । यहां महाकाल कॉरिडोर के पहले चरण का काम लगभग पूरा हो चुका है । मालवा व निमाड अंचल के लिहाज से इंदौर में ही अगले साल जनवरी में होने वाले चार बड़े अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में से किसी एक में प्रधानमंत्री की भागीदारी तय मानी जा रही है । अप्रैल- मई में ओंकारेश्वर में भी उनका दौरा प्रस्तावित है । प्रधानमंत्री यहां निर्माणाधीन 108 फीट ऊंची आदि 'स्टैच्यू ऑफ वननेस' व वेदांत संस्थान के पहले चरण का लोकार्पण करेंगे । वहीं मध्य क्षेत्र को साधने प्रधानमंत्री का एक अन्य कार्यक्रम भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी वर्ष समापन समारोह के बहाने तो विंध्य व महाकौशल के लिए,बहुप्रतीक्षित मोहनिया टनल का लोकार्पण भी जल्दी ही होने के आसार हैं । जाहिर है,प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों का संदेश मप्र ही नहीं आसपास के उन राज्यों में भी पहुंचेगा  जहां अगले साल - सवा साल में चुनाव होना है । फिर 2024 में लोकसभा के चुनाव तो हैं ही। 

** मप्र ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन को बनाया खास
शिवराज सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े हर मामले को लेकर बेहद संवेदनशील है । फिर वह मोदी सरकार द्वारा लागू योजनाओं व कार्यक्रमों को सबसे पहले अपनाने का मामला हो या उनका जन्मदिन। प्रधानमंत्री अपने 72वें जन्मदिन पर मप्र आए तो राज्य सरकार ने इसे बेहद खास बना दिया । प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर प्रदेश में बुजुर्गों को तीर्थ दर्शन कराने पांच नई ट्रेन चलाईं गयी तो तबादले चाहने वाले अधिकारी,कर्मचारियों की मुराद पूरी करने की शुरुआत भी इसी दिन से हुई। यही नहीं, वंचित पात्र को हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का 'मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान' भी प्रधानमंत्री के जन्मदिन से शुरू किया गया । इसी दिन प्रदेशभर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर भी लगे । देश के मुखिया के जन्मदिन को यादगार बनाने में संगठन भी पीछे नहीं रहा । इसी दिन से उसने सेवा पखवाड़े तो हरा भरा मप्र अभियान की शुरुआत की । अपने राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति ऐसा अनुराग व समर्पण किसी अन्य दल में देखने को नहीं मिलता । 

** मोदी है तो मुमकिन है....
गुजरता सप्ताह मप्र में चीतों के 70 साल बाद पुनर्वास के ऐतिहासिक पल का साक्षी बना । अपने जन्मदिन पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम में और चार चांद लगा दिए । चीतों की आमद मप्र के लिए निश्चित ही एक बड़ी सौगात है । इस मौके पर मप्र को प्रधानमंत्री से गिर के बब्बर शेर यानी एशियाटिक लायन गुजरात से दिलाए जाने की घोषणा का भी इंतजार रहा ,लेकिन कारोबारी नजरिया प्रदेशवासियों की उम्मीद पर एक बार फिर भारी पड़ा । बहरहाल,"मोदी है तो मुमकिन है..." यह नारा चीतों को छोड़े जाते वक्त भी कूनो में गूंजा और बब्बर शेरों को लेकर भी प्रदेशवासी आगे इसी उम्मीद से हैं । 
** प्रतिबद्धता ने जगाई उम्मीद...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में जारी जनसेवा पखवाड़ा प्रदेश भाजपा के उन नेताओं के लिए राहत देने वाला हो सकता है जो अपने बेटों को सक्रिय राजनीति में लाने को आतुर हैं । दरअसल,पखवाड़े के दौरान राष्ट्रीय नेतृत्व का जोर वादे की जगह प्रतिबद्धता पर है । इसमें 'वंशवाद से मुक्ति' विषय भी शामिल है। यानी पार्टी भविष्य में वंशवाद समाप्ति का कोई वादा नहीं सिर्फ प्रतिबद्धता प्रदर्शित करेगी। जाहिर है,इससे संभावना के द्वार भी खुलेंगे जो प्रदेश के नगरीय निकाय व इससे पहले के उपचुनाव में पूरी तरह बंद हो गए थे। 

** धर्मपत्नी ने किया सतर्क...
कहते हैं ,सफल पुरुष के पीछे उसकी धर्मपत्नी की भी अहम भूमिका होती है । अब उम्र में कम लेकिन पद में वरिष्ठ प्रमुख दल के एक नेताजी को ही लीजिए । हाल ही में उनकी गैर राजनीतिक धर्मपत्नी ने उन्हें ट्वीट कर आगाह किया कि हर व्यक्ति जो निकट है,जरूरी नहीं कि आपका हित सोचे । ना ही ये आवश्यक है कि वो आपकी खुशी में आनंद दे । शुभचिंतक वो नहीं हो सकता जो आपका शुभ होता देख चिंता में पड़ जाए.. बी अवेयर । बताया जाता है कि धर्मपत्नी की इस सलाह के बाद से नेताजी 'अपनों ' को लेकर काफी सतर्क हैं। 

** कुछ तो 'बात' है....
मूलतः बीकानेर राजस्थान निवासी प्रवीण सिंह अढायच मप्र कैडर के वर्ष 2012 बैच के अधिकारी हैं । करीब सवा दो साल पहले उन्हें बुरहानपुर जिले का कलेक्टर पदस्थ किया गया। प्रवीण सिंह की बात इसलिए कि उनके कार्यकाल में बुरहानपुर देश का पहला ऐसा प्रमाणित जिला बना, जिसने मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम "हर घर नल से जल" में सौ प्रतिशत लक्ष्य को हासिल किया । यही नहीं हाल ही में यह जिला वोटर आईडी कार्ड से आधार नंबर को शत-प्रतिशत जोड़ने वाला प्रदेश का पहला जिला भी बन गया । दो विधानसभा क्षेत्र वाले इस जिले में साढ़े पांच लाख से अधिक मतदाता हैं। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने उन्हें इसके लिए बधाई दी । जिले में पर्यटन को बढ़ावा  व 5 सौ बेरोजगार युवतियों को रोजगार दिलाने के मामले में अढायच पहले भी सम्मानित हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 72वें जन्मदिन पर आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में भी उनके आह्वान पर जिले के कई लोगों ने बढ़ - चढ़कर भागीदारी की। अब एक मैदानी अफसर का इससे बेहतर परफार्मेंस और क्या हो सकता है ?

 **यह भी खूब रही......
14 सितंबर को हिंदी दिवस के मौके पर राजधानी की एक अनुदान प्राप्त संस्था ने बड़े से सभागृह में संगोष्ठी का आयोजन किया। उम्मीद यही थी,कि सभागृह खचाखच भरा होगा,लेकिन ऐसा हो न सका । संगोष्ठी में कुल छह लोग जमा हुए । इनमें भी एक आयोजन स्थल संस्था के साहित्यकार शामिल थे । बहरहाल,संगोष्ठी हुई और भाषण भी खूब हुए । आधे लोगों ने श्रोता तो आधे ने मंच से वक्ता की भूमिका अदा की । खास बात यह कि भाषण के लिए बाकायदा माइक के जरिए ही बात रखी गई और सभागृह चौकीदार को भविष्य में ध्वनि विस्तारक व्यवस्था दुरुस्त रखने की नसीहत भी दी गई ।