श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या का किस्सा: मुलायम सरकार में पुलिस देखती रही,जेल तोड़ और हुलिया बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पहुंची थीं अयोध्या -

हुलिया बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पहुंची थीं अयोध्या -
 
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श्रीराम जन्म भूमि अयोध्या का किस्सा: मुलायम सरकार में पुलिस देखती रही,जेल तोड़ और हुलिया बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती पहुंची थीं अयोध्या -

पंकज पाराशर छतरपुर। अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि कारसेवा के लिए 1990 में लोगों में गजब का उत्साह दिखा था। लोग लाठी गोली की परवाह न करते हुए किसी भी कीमत पर अयोध्या जाने के लिए बेताब थे। वहीं इन कार सेवकों को रोकने के लिए पुलिस लगातार गिरफ्तारी कर रही थी। बांदा और चित्रकूट की सीमा से प्रवेश करने वाले कार सेवकों को बांदा की खुली जेल में रखा जा रहा था। इन्हीं कार सेवकों में शामिल थीं, फायर ब्रांड हिंदू वादी नेता साध्वी उमा भारती। उमा भारती को पुलिस ने चित्रकूट में गिरफ्तार किया और बांदा की अस्थाई जेल पीडब्ल्यूडी डाक बंगले में रखा था। जहां से रातों-रात उमा भारती इसी शहर के बजरंग दल कार्यकर्ता राज कुमार शिवहरे की मदद से फरार होकर अयोध्या पहुंच गईं थीं।
सांध्वी उमा भारती को जेल से भगाने में बजरंग दल के जिस नगर अध्यक्ष का योगदान था, उसी ने अपनी जुबानी पूरा किस्सा सुनाया। पूर्व विधायक राजकुमार शिवहरे जो उस समय बजरंग दल के नगर अध्यक्ष थे। उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर 1990 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में कार सेवा के लिए गए कारसेवकों पर गोली चलवा दी थी। इसमें सैकड़ों कार्यकर्ता मारे गए थे। इधर, लोगों में अयोध्या जाकर कार सेवा करने का जोश बढ़ रहा था। अलग-अलग जगहों में अलग-अलग रास्तों से लोग अयोध्या पहुंच रहे थे। जिन्हें सरकार के आदेश पर गिरफ्तार किया जा रहा था।

राम जन्मभूमि कार सेवा और उमा भारती की कहानी
उमा भारती को अस्थाई जेल में रखा गिरफ्तार करके कार सेवकों को अस्थाई जिलों में रखा जा रहा था। इसी दौरान सांध्वी उमा भारती और भाजपा की वरिष्ठ नेत्री विजयाराजे सिंधिया को चित्रकूट में गिरफ्तार करके बांदा के पीडब्ल्यूडी डाक बंगले में रखा गया था। इसे अस्थाई जेल का रूप दिया गया था। इनके साथ ही कई हजार कारसेवक गिरफ्तार करके राजकीय इंटर कॉलेज और अन्य स्थानों पर रखे गए थे।

महेश्वरी देवी मंदिर में बाल मुंडवाये
उमा भारती 31 अक्टूबर को सवेरे यहां के प्रसिद्ध महेश्वरी देवी मंदिर पहुंचीं और मंदिर के पास मौजूद कालका नाई को बुलाया और अपने बाल मुंडवाने की बात कही। नाई ने मंदिर परिसर में उनके बाल काट दिए। सिर मुंडवाने के बाद उन्होंने नाई से पूछा कि तुम्हारे बांदा में कोई ऐसा व्यक्ति है, जो मुझे अपनी कार से अयोध्या तक पहुंचा सके। इस पर नाई ने राजकुमार शिवहरे का नाम सुझाया और बताया कि उसके पास नई कार भी है। उमा ने उन्हें मंदिर परिसर में बुलाया। राज कुमार शिवहरे बताते हैं कि उस समय मैं अपने 10-12 साथियों के साथ मुलायम सिंह यादव का पुतला बनवा रहा था, ताकि गोली कांड के विरोध में उनका पुतला दहन किया जा सके। उधर, पुलिस मेरी तलाश कर रही थी। जैसे ही हम लोगों ने पुतला दहन किया। वैसे ही मेरे पास संदेशा आया कि उमा जी ने तुम्हें महेश्वरी देवी मंदिर में बुलाया है।

उमा भारती ने पूछे तमाम सवाल
राजकुमार शिवहरे ने बातया कि मैं फौरन मंदिर पहुंचा, जहां मौजूद सुश्री उमा भारती ने मुझसे तमाम सवाल पूछे। कहा कि क्या तुम सुरक्षित मुझे अयोध्या तक पहुंचा सकते हो? राजकुमार ने बताया कि उस समय मुझमें उमंग और उत्साह था। मैंने तुरंत हामी भर दी और मारुति वैन अपने घर से मंगवाई, जिसमें ड्राइवर नवल था। तब उनके साथ जाने से पहले मैंने कहा कि मुझे पुलिस ढूंढ रही है और मैं बाहर निकला तो मुझे गिरफ्तार कर लेगी। इस पर उन्होंने कहा कि तुम मेरे साथ रहो, तुम्हें कोई पकड़ेगा नहीं। मैंने वैसा ही किया, उनके साथ मारुति वैन में बैठकर केन नदी पहुंचा। केन नदी के नाव घाट में उन्होंने स्नान किया और कपड़े बदलकर डाक बंगले वापस आए। डाक बंगले में ही यहां से भागने की योजना तैयार की गई।

इस घटना के बाद राजकुमार बने विधायक
इस घटना के बाद बजरंग दल कार्यकर्ता राजकुमार शिवहरे को खासी लोकप्रियता मिली। 1993 में जब विधानसभा चुनाव हो रहे थे तब उमा भारती ने बांदा सदर सीट से राजकुमार शिवहरे को टिकट देने की सिफारिश की थी। इसके आधार पर उन्हें भाजपा का टिकट मिल गया। उन्होंने उस समय 45,301 मत हासिल कर बसपा के दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी को हराकर भाजपा का कमल खिलाया था।