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यूपी में 3 IPS की सेवा समाप्त, अब बाकी दागियों को भी बाहर का रास्ता दिखाएंगी योगी सरकार !

लखनऊ। यूपी के तीन आईपीएस अफसरों को रिटायरमेंट से पहले वीआरएस दिए जाने के बाद महकमे में तैनात अन्य दागी पुलिस अफसरों व कर्मियों पर नौकरी जाने का खतरा मंडरा है। खासतौर से महोबा व्यवसायी की मौत के मामले में वॉन्टेड आईपीएस मणिलाल पाटीदार का नाम इस लिस्ट में सबसे ऊपर है।

इन आईपीएस के अलावा भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित चल रहे दिनेश चंद्र दुबे, आईपीएस अनन्त देव तिवारी, अभिषेक दीक्षित, अजयपाल शर्मा व हिमांशु कुमार पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।

बर्खास्त हो सकते हैं मणिलाल

आईपीएस मणिलाल पाटीदार 50 हजार के इनामी हैं। पुलिस को कई महीनों से उनकी तलाश है। पाटीदार के खिलाफ दर्ज मुकदमों और उनके हाजिर नहीं होने की वजह से जल्द ही उनकी बर्खास्तगी पर फैसला लिया जा सकता है।

अरविंद सेन पर हो सकती है कार्रवाई

बस्ती में एक लड़की को परेशान करने वाले दरोगा की सेवाएं भी खत्म करने की तैयारी है। पशुपालन घोटाले के आरोपी रिटायर हो चुके आईपीएस अरविंद सेन के खिलाफ भी सरकार कुछ कड़ा फैसला कर सकती है।

बिकरू कांड के आरोपी भी नजर

बिकरू कांड के आरोपी कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ सरकार जल्द ही सख्त कदम उठा सकती है। अपराधी विकास दुबे को संरक्षण देने वाले करीब 30 से ज्यादा पुलिसवालों के खिलाफ एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कार्रवाई की सिफारिश की थी।
अमिताभ को पहले ही हो गई थी जबरन सेवामुक्त की सूचना
अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद अमिताभ ठाकुर ने राज्य सरकार को लिखा अपना पत्र सोशल मीडिया पर वायरल किया है। उन्होंने चार दिसंबर 2019 को यूपी सरकार को एक पत्र लिखा था। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद उस पत्र का कुछ अंश अब सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हो गए। उन्होंने सरकार को लिखे पत्र में कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो यह घोर अन्यायपरक एवं मनमाना होगा।

पत्र में अमिताभ ने लिखी थी यह बात

अमिताभ ने पत्र में लिखा था कि उनके कथित रूप से असुविधाजनक और अप्रिय होने, मुकदमेबाज होने, आपराधिक वाद दायर करने और प्रशासनिक कार्यवाही करने की मांग करने की वजह से उन्हें उच्चस्तरीय दवाब में अनिवार्य सेवानिवृति देकर नौकरी से अलग करने के मौखिक निर्देश हुए हैं। इन आदेशों का शीघ्र क्रियान्वयन होगा।
‘की गई फर्जी विभागीय कार्रवाई’
अमिताभ ने पत्र में लिखा था कि इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था में अवांछित कर्मी को अलग करना नहीं है। बल्कि, इस प्रावधान का गलत प्रयोग करते हुए व्यवस्था में ताकतवर स्थानों पर बैठे तमाम व्यक्तियों के लिए असुविधाजनक और अप्रिय व्यक्ति को व्यवस्था से अलग करना होगा। वह किसी भी प्रकार से अवांछित कर्मी नहीं हैं। उन्होंने अपने ऊपर फर्जी तरीके से विभागीय कार्यवाही शुरू करने और उन्हें लम्बे समय तक जानबूझ कर कार्यवाही को लंबित रखे जाने की बात भी पत्र में कही थी।

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Updated on April 23, 2021 5:17 pm

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