बांधवगढ टाईगर रिजर्व : क्या बाघ विहीन हो जाएगा बांधवगढ टाईगर रिजर्व मादा बाघिन टी -66 की टीटमेंट के दौरान मौत

क्या बाघ विहीन हो जाएगा बांधवगढ टाईगर रिजर्व  मादा बाघिन टी - 66 की  टीटमेंट के दौरान  मौत 
 
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File photo

-मप्र में  बाघों की मौत के  मामले ने राज्य के वन्यजीव प्रतिष्ठान में  बजी खतरे की घंटी
- 2021 में 12 माह के दरमियान  41  बाघ-बाघिनों की मौत

- साल खत्म  होने में एक महीने पहले पूरा है बाकी -मप्र में बाघ मृत्यु दर (2020 में 32 से  रही ऊपर)
- मप्र के टाइगर रिजर्वो में  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा हुई बाघों की मौत
-पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली संदेह हस्पद,खामोस विभागीय अधिकारी
-बांधवगढ टाईगर रिजर्व मे फिर हुई एक  मादा बाघिन की मौत
-बांधवगढ टाईगर रिजर्व मे नही थम रहा बाघो के मौत का सिलसिला
-पन्ना टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था क्या बांधवगढ़ में पैदा हो रहे हैं ऐसे हालात

 उदित नारायण 

भोपाल । मप्र में वन्य प्राणियों की सुरक्षा पर करोड़ो रुपये खर्च होने के बादजूद प्रदेश के अभ्यारण्य व जंगलो में बाघ-बाघिन सुरक्षित नहीं हैं। बांधवगढ टाईगर रिजर्व में रविवार 28 नवंबर को टी -66  मादा बाघिन की  टीटमेंट के दौरान  मौत हो गई । क्या बाघ विहीन हो जाएगा बांधगढ़ टाइगर रिजर्व ऐसा वन प्राणी प्रेमी मानने लगे हैं।
मृतक मादा बाघिंन के दाहिने पैर में कई महीने से गंभीर चोट थी जिसे प्रबंधन अनदेखा करते रहे और बाघिन की मौत हो गई। बताया जाता है कि 26 नवंबर को  बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन की टीम ने पनपथा (बफर) परिक्षेत्र के खितौली (बफर) गेट से  बाघिन का रेस्क्यू कर
मादा बाघिन को  टीटमेंट के लिए मगधी रेंज के बहेरहा इंक्लोजर में किया  शिफ्ट किया गया था।
लगातार बांधवगढ मे बाघों की मौत को लेकर वन्य प्रमियों में  निराशा छाई हुई है।
2021 में 12 माह के दरमियान  41  बाघ-बाघिनों की मौत होने के बाद भी वाइल्ड लाइफ प्रबंधन बाघ-बाघिनों की मौत के मामले में गंभीर नहीं है।


बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खेतौली कोर क्षेत्र में  मादा बाघ T-66 का रेस्क्यू किया गया। बाघिन कई दिनों से घायल थी, जिसके रिकवर न होने की वजह से उसको रेस्क्यू के दौरान ट्रेंकुलाइज कर, उसके दाहिने पैर का ऑपरेशन किया गया, और उसे इनक्लोजर में शिफ्ट कर उसे वन अमले की सतत निगरानी में छोड़ दिया गया, जिससे समय रहते जरुरत अनुसार चिकित्सकों द्वारा ट्रीटमेंट दिया जा सके, वहीं इनक्लोजर में रहने के कारण उसे अन्य किसी तरह का खतरा दूसरे टाइगर से न हो बावजूद बाघिन की मौत हो गई है।
गौरतलब रहे कि पार्क प्रबंधन की वजह से 15 साल पहले पन्ना टाइगर रिजर्व बाघ विहीन हो गया था, यहां एक एक कर बाघ बाघिनों की मौत हो गई थी, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी ऐसे हालत  नजर आने लगे हैं।
खितौली में बाघिन टी-66 का रेस्क्यू :
बीटीआर प्रबंधन ने  बताया कि विगत कुछ दिनो से परिक्षत्र पनपथा बफर तथा खितौली कोर में एक घायल मादा बाघिन T66 को हाथियों एवं कर्मचारियों के सहयोग से ट्रेक किया जा रहा था, एवं उसके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही थी। स्वास्थ्य में सुधार न होने की दशा में घायल बाघिन का रेस्क्यू किया गया।


दाहिने पैर से चोंटिल :
शुक्रवार को घायल मादा बाघिन T66 का खितौली बीट के कक्ष RF 501 में होने की सूचना पर रेस्क्यू टीम द्वारा हाथियों एवं कर्मचारियों के सहयोग से घायल मादा बाघ को ट्रेंक्यूलाईज कर रेस्क्यू किया गया। बाघिन के पिछले दाहिने पैर में गंभीर चोंटे बताई जा रही हैं, जिसका ऑपरेशन देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर की संचालक डां. शोभा जांवरे, डॉ अमाले, डॉ सोमेंस एवं डॉ नितिन गुप्ता सहायक शल्यज्ञ विशेषज्ञ दल द्वारा किया गया।
इनक्लोजर में रखी गई  थी बाघिन :
वहीं मादा बाघ को ऑब्जेर्वेशन हेतु बहेरहा इन्क्लोजर में रखा गया है। इस दौरान बांधवगढ़ उप संचालक लविश भारतीय सहित बीटीआर के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। टाइगर रिर्जव में हो रही बाघ-बाघिनों की मौत से  सरकार और विभाग  बेगाना बना हुआ है। बाघो की मौत को हर बार आपसी लड़ाई का स्वरुप देकर टाल दिया जाता रिजर्वो में शिकारियों की आवाजाही भी संदेह को जन्म दे रही है। सनद रहे कि समय रहते बाघों की हो रही मौतों का आकलन नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब बांधवगढ़ रिजर्व भी बाघ विहीन हो जाएगा।